अण्डमान तथा निकोबार द्वीप समूह के परिवहन क्षेत्र में 'जहाजरानी सेवा निदेशालय' (डी एस एस) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चूंकि अण्डमान तथा निकोबार द्वीप समूह की भौगोलिक स्थिति मुख्य भूमि-भारत से लगभग 700 समुद्री मील की दूरी पर है, तथा इस द्वीप-पुंज में द्वीपों के अलग-अलग बिखरे होने के कारण, समुद्री परिवहन द्वीपवासियों की जीवन रेखा है।
अण्डमान तथा निकोबार प्रशासन के तहत 'जहाजरानी सेवा निदेशालय' मुख्य भूमि और द्वीप के बीच तथा अण्डमान तथा निकोबार में फैले हुए द्वीपों के बीच भी प्रमुख जलयान सेवा के लिए मुख्य हितधारक और जिम्मेदार है।
वर्तमान में जहाजरानी सेवा निदेशालय 37 द्वीपों में से 29 बसे हुए द्वीपों में जलयान सेवाऍं प्रदान कर रहा है।
भारत की मुख्य भूमि से अण्डमान तथा निकोबार द्वीप समूह की दूरस्थता, यात्रा समय में होने वाले विलंब को वहन न कर पाना तथा मुख्य भूमि में चलने वाली वाणिज्यिक क्राफ्ट के लिए उपलब्ध री-फिट सेवाएं, जिससे चलते जहाजरानी सेवा निदेशालय के लिए यह जरूरी है कि वह स्वयं एक स्वतंत्र, पूर्ण विकसित समुद्री इकाई जो द्वीपों को जोड़ने वाले जहाजों को परिचालन और रखरखाव सुविधाएँ प्रदान करने में सक्षम हो।
दुनिया भर में नौवहन क्षेत्र में संकुचन के कारण जहाजरानी सेवा निदेशालय के सामने चुनौती खड़ी हो गई है। जहां आधुनिक जहाजों का रखरखाव पहले की तुलना में कहीं अधिक जटिल हो गया है जो लगभग आधी सदी पहले से शुरू हो गया था। पुराने जहाजरानी सेवा निदेशालय बेड़े में बार-बार होने वाली ब्रेकडाउन की घटनाऍं, जिसमें भारी परिचालन व्यय और सेवाओं में व्यवधान शामिल है। जहाजरानी सेवा निदेशालय बेहतर यात्री सुविधा और कम यात्रा समय वाले उन्नत आधुनिक जहाजों को प्राप्त करके अपने बेड़े की ताकत का विस्तार करने की योजना बना रहा है।
यद्यपि मुख्यभूमि-द्वीप क्षेत्र को जोड़ने के लिए हवाई सेवाओं की ओर रुख करने पर जोर दिया जा रहा है, तथापि अंतर-द्वीपीय और तटीय क्षेत्र लागत प्रभावशीलता और इसके जहाजी बेड़े द्वारा पर्यटकों और यात्रियों की बड़ी संख्या को स्थानांतरित करने की क्षमता के कारण मुख्य रूप से नौवहन पर निर्भर रहेंगे।
विश्वव्यापी नौवहन रुझान यह संकेत देते हैं कि बड़े ओवरहेड और बुनियादी ढांचे की लागत के कारण स्वामित्व के बदले जहाजों को किराये पर लेना बेहतर है। जहाजरानी सेवा निदेशालय ने जहाजों को किराए पर लेने का प्रयोग किया है और परिणाम उत्साहजनक रहा है।
हालाँकि जहाजरानी सेवा निदेशालय आज की तारीख में इन्वेंटरी में रखे गए 66 जहाजों का मालिक है, फिर भी डीओसी धारक होने के नाते भारतीय नौवहन निगम (एस. सी. आई) ने जहाजरानी सेवा निदेशालय को पिछले 40 वर्षों से तकनीकी सहायता प्रदान की है। आज, पोर्ट ब्लेयर भारतीय नौवहन निगम का एक सहायक कार्यालय का संचालन हो रहा है, जो अण्डमान तथा निकोबार प्रशासन को रखरखाव, प्रबंधन और प्रमाणन सेवाएं प्रदान करता है और यह नौवहन महानिदेशक और नौवहन मंत्रालय द्वारा नियंत्रित होता है।
फोरशोर, बंदरगाह, उपयोगी जहाजों तथा अधिग्रहण के तहत नये जहाजों की मरममत और रखरखाव करने के उद्देश्य से, विभाग ने नये अधिग्रहीत जहाजों की मरममत की जरूरतों की पूर्ति हेतु आधुनिक यंत्रों ओर उपकरणों सहित ड्राई-कॉक और कार्यशालाओं को आधुनिक एवं अग्रिम बनाने का प्रस्ताव किया है। मौजुदा कार्यशाला में यंत्र और उपकरण या तो अप्रचलित हो गए है या पुराने हो गए है, जिसे बदलने की आवश्यकता है। इस दिशा में मेसर्स कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) को व्यवहार्यता अध्ययन के कार्य सौंपे गए हैं। और यह कार्य प्रगति पर है।
मुख्य भूमि और अंतर्द्वीपीय क्षेत्र में संचालित होने वाले बड़े जहाजों को मरम्मत / लिए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड भेजा जाता है, क्योंकि पोर्ट ब्लेयर में पर्याप्त मरम्मत सुविधाएँ उपलब्ध नहीं है। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, भारतीय नौवहन निगम और जहाजरानी सेवा निदेशालय के बीच मुख्यभूमि-द्वीप और अंतर-द्वीपीय जहाजों के समय पर मरम्मत / वार्षिक यात्री सर्वेक्षण (APS) के लिए एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन संपन्न हुआ है ।
मरीन डॉकयार्ड की स्थापना वर्ष 1893 में की गई थी। यह द्वीपों में उपलब्ध एकमात्र डॉकयार्ड सुविधा है और यह प्रशासन की जहाजों की आवश्यकताओं के अतिरिक्त नौसेना, तटरक्षक और अन्य निजी क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करता है।
मौजूदा टिकटिंग प्रणाली का उन्नयन : क्रिस के माध्यम से एन. आई. सी. एस. आई क्लाउड पर ऑन-प्रिमाइसेस स्टार्स अवसंरचना के स्थानांतरण का काम पूरा हो गया है। आधुनिकीकरण से पर्यटन और द्वीपों की जनता को वेब-आधारित पूछताछ और वेब-आधारित टिकटिंग की सुविधा मिलेगी।
सचिव, जहाजरानी और कैप्टन अतुल कुमार सिंह (जहाजरानी सेवा निदेशालय) की उपस्थिति में मुख्य सचिव (अण्डमान तथा निकोबार द्वीप समूह), श्री केशव चंद्रा, भा.प्र.से., द्वारा 17 अप्रैल 2023 को एक संक्षिप्त समारोह में स्टार्स ई-टिकटिंग के साथ निदेशालय की नई वेबसाइट लॉन्च की गई।
नई ऑन-लाइन आरक्षण व्यवस्था यात्रियों को सुविधाजनक और परेशानी मुक्त बुकिंग का विकल्प प्रदान करेगी और वेबसाइट पर उपलब्ध विभिन्न विकल्पों के माध्यम से भुगतान किया जा सकेगा।